आसमान सी बेपनाह नहीं हैं ख्वाहिशें मेरी। आसमान सी बेपनाह नहीं हैं ख्वाहिशें मेरी।
बोलना पड़े जहाँ सोचकर चले चलो उस रिश्ते को तोड़कर बोलना पड़े जहाँ सोचकर चले चलो उस रिश्ते को तोड़कर
अनोखा सा होता है वो रिश्ता जहाँ बहन की आँखों में आँसू देख दिल भाई का है रोता है! अनोखा सा होता है वो रिश्ता जहाँ बहन की आँखों में आँसू देख दिल भाई का है ...
इंसानियत के बारे में एक कविता...। इंसानियत के बारे में एक कविता...।
मौसम...। मौसम...।
इंसान भटकता जा रहा...। इंसान भटकता जा रहा...।